अचानक से राह में मिले दो राही, नाम था गलत और सही
दोनों ने स्वयं को दुसरे से बड़ा दिखाने को अपनी अपनी कहानी कही
सही ने सत्य पर चलने वालों के उदाहरणों की लगा दी बौछार
परन्तु इन तीखे व्यंगों से भी नहीं मानी गलत ने अपनी हार
जब बताना शुरु किया की किस तरह लोग गलत करते हुए इतना आगे बढ़ गए हैं
और न जाने कितने उसे गलत साबित करते करते ही मिटटी के अंदर गढ़ गए हैं
दोनों के बीच वाद विवाद जब पहुंचा चरम सीमा से आगे
तो उसे सुलझाने को वे दोनों सीधा मनुष्य के पास भागे
उन्हें तो भनक भी न थी मनुष्य स्वयं में इतना मक्कार है
परिस्तिथि चाहे कुछ भी हो जाये मानता न अपनी हार है
मनुष्य ने दोनों को अपनी बात रखने का मौका दिया भरपूर
परन्तु इतने में भी दोनों की मुश्किल न होती दिखी दूर
स्वार्थी मनुष्य ने आखिर चालाकी से बीच का एक रास्ता निकला
गलत कारनामों को सफ़ेद चादर ओढ़ाकर सही के मुँह में जड़ दिया ताला
परन्तु वह भी कब तक सच्चाई से मुँह मोड़े रहता
कब तक सही गलत द्वारा किये अत्याचारों को सहता
फिर जब मनुष्य का स्वयं का अस्तित्व ही खतरे में आया
बुद्धि विवेक जगा तो उसने सही को उसके असल रूप में अपनाया
परन्तु अभी भी सही गलत मे खुद को सर्वश्रेष्ठ कहलाने की जंग जारी है
कभी सही तो कभी गलत का पलड़ा भारी है।
तो उसे सुलझाने को वे दोनों सीधा मनुष्य के पास भागे
उन्हें तो भनक भी न थी मनुष्य स्वयं में इतना मक्कार है
परिस्तिथि चाहे कुछ भी हो जाये मानता न अपनी हार है
मनुष्य ने दोनों को अपनी बात रखने का मौका दिया भरपूर
परन्तु इतने में भी दोनों की मुश्किल न होती दिखी दूर
स्वार्थी मनुष्य ने आखिर चालाकी से बीच का एक रास्ता निकला
गलत कारनामों को सफ़ेद चादर ओढ़ाकर सही के मुँह में जड़ दिया ताला
परन्तु वह भी कब तक सच्चाई से मुँह मोड़े रहता
कब तक सही गलत द्वारा किये अत्याचारों को सहता
फिर जब मनुष्य का स्वयं का अस्तित्व ही खतरे में आया
बुद्धि विवेक जगा तो उसने सही को उसके असल रूप में अपनाया
परन्तु अभी भी सही गलत मे खुद को सर्वश्रेष्ठ कहलाने की जंग जारी है
कभी सही तो कभी गलत का पलड़ा भारी है।